बिहार में मंत्रियों का काफ़िला - महीने का 72 लाख का डीजल

बिहार में मंत्रियों का काफ़िला - महीने का 72 लाख का डीजल

बिहार मंत्रियों के काफिलों पर डीजल खर्च : हालिया तथ्यों पर विशेष रिपोर्ट

बिहार में हाल के दिनों में मंत्रियों और वीआईपी काफिलों के डीजल खर्च को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा ईंधन बचत की अपील के बाद बिहार सरकार ने भी अपने मंत्रियों के काफिलों के आकार में कटौती की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

कितना है डीजल खर्च?

हालिया रिपोर्टों के अनुसार बिहार में एक मंत्री के काफिले में औसतन 5 गाड़ियाँ शामिल रहती हैं। इनमें मुख्य रूप से डीजल से चलने वाली SUV जैसे Innova और Scorpio शामिल होती हैं। एक काफिला प्रतिदिन लगभग 100–150 किलोमीटर चलता है। औसत 10 किमी प्रति लीटर माइलेज मानें तो:

  • एक गाड़ी प्रतिदिन लगभग 15 लीटर डीजल खर्च करती है
  • 5 गाड़ियों का काफिला प्रतिदिन करीब 75 लीटर डीजल जलाता है

बिहार में मुख्यमंत्री को छोड़कर लगभग 34 मंत्री हैं। इस हिसाब से मंत्रियों के काफिलों में प्रतिदिन करीब 2550 लीटर डीजल की खपत होती है। मासिक खपत लगभग 76,500 लीटर तक पहुँचती है।

यदि डीजल का औसत मूल्य 94 रुपये प्रति लीटर माना जाए, तो:

  • मासिक खर्च लगभग ₹71.9 लाख
  • वार्षिक खर्च लगभग ₹8.6 करोड़ के आसपास बैठता है

रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया है कि यदि काफिलों की गाड़ियों की संख्या आधी कर दी जाए, तो राज्य सरकार हर महीने लगभग ₹36 लाख बचा सकती है।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों की पहल

Samrat Choudhary ने अपने काफिले को छोटा करने और इलेक्ट्रिक वाहन के उपयोग की शुरुआत करने की घोषणा की है। उन्होंने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से अतिरिक्त एस्कॉर्ट वाहन कम करने की अपील भी की।

कुछ मंत्रियों ने कार-पूलिंग भी शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार:

  • कुछ मंत्री एक ही वाहन से सचिवालय पहुँचे
  • कुछ मंत्रियों ने सार्वजनिक परिवहन और सीमित यात्रा का समर्थन किया
  • डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने अपने वाहनों की संख्या आधी करने की बात कही

मुख्यमंत्री काफिला भी चर्चा में

हालांकि ईंधन बचत अभियान के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री के काफिले में अब भी लगभग 21 वाहन शामिल हैं, जिससे विपक्ष ने सवाल उठाए।

आगे क्या हो सकता है?

सूत्रों के अनुसार बिहार सरकार निम्न कदमों पर विचार कर रही है:

  • मंत्रियों के लिए अनलिमिटेड पेट्रोल-डीजल सुविधा पर सीमा तय करना
  • अधिकारियों के मासिक ईंधन कोटे में कटौती
  • वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा
  • सप्ताह में एक “नो व्हीकल डे” लागू करना
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों को बढ़ाना

निष्कर्ष

बिहार में मंत्रियों के काफिलों पर होने वाला डीजल खर्च अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक बहस का विषय बन गया है। बढ़ती तेल कीमतों और सरकारी खर्च के दबाव के बीच यदि वास्तव में काफिलों की संख्या घटाई जाती है, तो करोड़ों रुपये की वार्षिक बचत संभव है। साथ ही यह आम जनता के बीच सादगी और संसाधन बचत का संदेश देने का प्रयास भी माना जा रहा है।